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सोमवार, 21 मार्च 2011

महिला दिवस बुनियादी तौर पर श्रम की गरिमा का प्रतीक है



भारतीय महिला फेडरेशन
जिला इकाई  इन्दौर


प्रेस विज्ञप्ति


महिला दिवस बुनियादी तौर पर श्रम की गरिमा का प्रतीक है


इन्दौर] 12 मार्च 2011-

बाजार की कोशिश है कि हर चीज अपना असल अर्थ खोकर ऐसे अर्थ पा ले जिससे वो बाजार के मुनाफे की हो जाए। आजकल महिला दिवस पर सौंदर्य प्रसाधन और तरह&तरह के वस्त्राभूषण बनाने वाली कंपनियाँ फैशन शो आयोजित करती हैं। मीडिया भी ऐसी चीजों की नुमाइश करता है। लेकिन ये सम-हजयना जरूरी है कि महिला दिवस सिर्फ औरतों के पहनने-ंउचयओ-सजय़ने या सिर्फ पिकनिक&पार्टी का ही दिन नहीं है। ये दिन उन कामकाजी महिलाओं की याद में मनाया जाता है जो अपने हक और श्रम के सम्मान की खातिर शहीद हुईं।
महिला दिवस के कार्यक्रमों की श्रृंखला में भारतीय महिला फेडरेशन और घरेलू कामकाजी महिला संगठन ने मिलकर 11 मार्च 2011 को कामकाजी महिलाओं के संघर्ष और उनकी ताकत विषय पर व्याख्यान] एक नाटक और महिलाओं की रैली का आयोजन किया गया। अर्थशास्त्री डॉ- जया मेहता ने अपरोक्त बातों के साथ ही बताया कि सरकार के वित्तमंत्री ने हाल का बजट पेश करते हुए कहा कि हमारे देश में अनाज का उत्पादन तो ठीक हुआ है लेकिन वो एक जगह से दूसरी जगह तक कुशलता से पहुँचाया नहीं जा सका इसलिए अनाज का परिवहन ठीक करने के लिए उसे रिलायंस जैसी कंपनियों को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार खाद्य सुरक्षा कानून को लगातार टालती जा रही है और दूसरी तरफ अनाज को विशाल कंपनियों के चंगुल में फँसाना चाहती है जिनका मुख्य मकसद गरीब जनता का पेट भरना नहींे बल्कि मुनाफा कमाना है। अन्य पोषण सामग्री तो छोड़िए देश के लोगों की आधी आबादी को अनाज तक नसीब नहीं होता। इन सब लोगों में भी औरतों की हालत बद से बदतर है। देश की 45 प्रतिशत महिलाएँ रक्ताल्पता यानी एनीमिया से पीड़ित हैं। कमजोर माँएँ कमजोर बच्चों को जन्म देती हैं। नतीजा ये है कि हमारे देश में कुपोषित बच्चों की तादाद दुनिया में सबसे ज्यादा है। इन कमजोर बच्चों का मस्तिष्क भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता। जिन्हे भरपेट खाना तक नहीं मिल पाता, वे भला खाते&पीते अमीर और मध्यम वर्ग के बच्चों के साथ किस तरह तरक्की की दौड़ में बराबरी से दौड़ सकते हैं।
उन्होंने ये भी कहा कि आज चाहे मजदूरों के संघर्ष हों या दलितों] आदिवासियों] किसानों के] हर संघर्ष की अगली कतार में बहुत बड़ी तादाद में महिलाएँ आयी हैं। उनके भीतर संघर्ष के लिए जरूरी ताजगी भरी उर्जा मौजूद है। संसद के सामने 23 फरवरी का प्रदर्शन हो या 24 फरवरी की आँगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं की रैली, दोनों में ही महिलाओं ने दिल्ली की सड़कों को जाम कर दिया। इस लड़ाई को और प्रभावी तौर पर लड़ा जाना जरूरी है वर्ना बाजार गरीब-ंउचयमेहनतकश महिलाओं व पुरुषों को जीने ही नहीं देगा।
शहीद भवन पर आयोजित इस सभा को संबोधित करते हुए घरेलू कामकाजी महिला संगठन की ओर से सिस्टर रोसेली ने कहा कि महिलाओं को भी ये सम-हजयना चाहिए कि उनकी समस्याओं का हल धार्मिक जुलूसों में शामिल होने से नहीं निकलेगा। उन्हें संगठित होकर अपनी लड़ाई लड़नी होगी। हमें उन्हें जोड़ने के और मजबूत उपाय करने चाहिए। आँगनवाड़ी यूनियन की अनीताजी ने कहा कि 21 बरस से लड़ते&लड़ते उन्होंने रु- 275 मासिक से 1500 और अब 3000 का वेतन हासिल हुआ है। ये लड़ाई जारी रखनी होगी नहीं तो सरकार कुछ नहीं देने वाली। सभा को निर्मला देवरे और मनीषा वोहल ने भी संबोधित करते हुए कहा कि हम मजदूर औरतों को एक&दूसरे की मदद के लिए साथ आना चाहिए तभी बाकी महिला मजदूर भी हमसे जुड़ेंगी और सुरक्षा की भी गारंटी होगी।
भारतीय महिला फेडरेशन की सचिव सारिका श्रीवास्तव ने गतिविधियों का ब्यौरा देते हुए पिछले वर्ष के दौरान दिवंगत हुए कॉमरेड अनंत लागू और कॉमरेड राजेन्द्र केशरी को सभा की ओर से श्रृद्धांजलि दी। सभा का  संचालन किया पंखुड़ी मिश्रा ने।  सभा के अंत में महिला मजदूरों के संघर्षों पर आधारित एक नाटक की प्रस्तुति हुई जिसमें गारमेंट फैक्टरी में काम करने वालीं, बीड़ी बनाने वालीं] भवन निर्माण मजदूरी करने वालीं और जमीन से बेदखली की परेशानियों से लड़ने वाली आम मेहनतकश महिलाओं के जीवट और जोश की कहानियाँ थीं। नाटक का शीर्षक था जब हम चिड़िया की बात करते हैं। नाटक में पंखुड़ी] रुचिता] सारिका] नेहा] शबाना] रवि और आशीष ने अभिनय किया।
सभा व नाटक के उपरांत महिलाओं ने शहीद भवन से मालवा मिल चौराहे तक नारे लगाते हुए जुलूस निकाला।
इससे पहले 8 मार्च को कल्पना मेहता ने स्वास्थ्य की राजनीति का शिकार बनतीं महिलाएँ विषय पर व्याख्यान दिया था और बताया था कि किस तरह अमेरिका व अन्य  विकसित देश तरह&तरह के गर्भ&निरोधक भारत जैसे तीसरी दुनिया के देशों की महिलाओं पर आजमाते हैं और अशिक्षित व जागरूकताहीन जनता की जिंदगी के साथ नेता] अफसर और कंपनियाँ गिरोह बनाकर खिलवाड़ करती हैं।

प्रति
सम्पादक महोदय]
प्रकाशनार्थ / प्रसारार्थ

संपर्कः

सारिका श्रीवास्तव
सचिव] भारतीय महिला फेडरेशन] इन्दौर इकाई- शहीद भवन] 65] राजकुमार मिल ओवरब्रिज के नीचे] न्यू देवास रोड] इन्दौर- मोबाइलः 9425096544

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